भारत में गेहूं उत्पादन - भौगोलिक स्थिति, तापमान, वर्षा, मिट्टी

 

भारत में गेहूं उत्पादन : गेहूं खाद्यान्नों में प्रमुख माना जाता है। भारत में प्राचीन काल से ही गेहूं की खेती की जा रही है। मोहनजोदड़ो की खुदाई व सिंधु नदी की घाटी में 3000 वर्ष पूर्व का गेहूं मिला है। विश्व में भारत गेहूं उत्पादन की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है। यह रवि की शीतकालीन फसल है। गेहूं की बुवाई व कटाई का समय देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। 

1966 के बाद हरित क्रांति में गेहूं के उत्पादन क्षेत्र और उत्पादन में बहुत वृद्धि हुई है 2019-20 में भारत में 1062 लाख टन उत्पादन किया गया है। गेहूं के उत्पादन में इस आशा के वर्दी का कारण गेहूं की नई किस्म का सबसे अधिक सफल होना है। इन बीजों पर कीटो व बीमारियों का प्रभाव कम पड़ता है। 

भारत में गेहूं उत्पादन



गेहूं के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाएं

गेहूं मुख्यतः शीतोष्ण कटिबंध की फसल है। भारत में प्रत्येक राज्य में थोड़ा बहुत गेहूं अवश्य उगाया जाता है। 

ताप - यह ठंडी और नाम जलवायु में बढ़ता है। और गर्म व शुष्क जलवायु में पकता है। भारतवर्ष में गेहूं के अधिकतर खेत सतलज गंगा मैदान के उच्च और शुष्क भागों में पाए जाते हैं। पाला इसकी खेती के लिए हानिकारक है। फसल पकने समय उच्च तापमान तेज धूप और स्वच्छ आकाश की आवश्यकता होती है। जाड़े के प्रारंभ में गेहूं बोते समय तापमान 10 डिग्री बढ़ते हुए 15 डिग्री तक रखते समय 25 डिग्री से तापमान उपयुक्त रहता है। 

वर्षा - गेहूं के बोने से पूर्व भूमि में नमी की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन असम बंगाल और पश्चिमी तटीय भागों में अधिक वर्षा के कारण फसल नहीं बोई जाती है। इसके लिए 25 से 75 सेंटीमीटर तक की वर्षा उपयुक्त होती है। पंजाब व उत्तर प्रदेश के शुष्क भागों में कम वर्षा होने के कारण सिंचाई की सहायता से गेहूं उगाया जाता है। 

मिट्टी - गेहूं की खेती के लिए हल्की दोमट व चिकनी मिट्टी अच्छी मानी जाती है। काली मिट्टी में भी इसकी अच्छी पैदावार होती है। इसके लिए समतल भूमि होनी चाहिए जैसे आधुनिक यंत्रों का उपयोग अधिक किया जा सके। 


भारतीय गेहूं की विशेषताएं

  • भारत में गेहूं की खेती उष्ण और शीतोष्ण कटिबंध में की जाती है। दक्षिणी भाग में अधिकता के कारण फ़सल जल्दी पक जाती है। 
  • यहां पर ताप का एकदम बढ़ना व तेज हवाएं गेहूं की फसल को शीघ्र ही पका देती है। जिससे गेहूं के दाने का पूरा विकास नहीं हो पता है। 
  • भारत के अधिकतर भागों में शीतकाल में वर्षा नहीं होती है। जबकि गेहूं की अधिकांश खेती शीतकाल में होती है जिससे उत्पादन कम होता है। 
  • मार्च के महीने में ताप बढ़ने से फसले पकने लगती है। जिससे गेहूं अच्छी किस्म का पैदा नहीं हो पता। 
  • गेहूं की खेती के लिए पाला - ओलावृष्टि बहुत ही हानिकारक होती है। जिससे गेहूं की फसल को नुकसान होता है। 
  • भारत में गेहूं के अधिकांश खेती सिंचाई के सहारे की जाती है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। वहां प्रति हेक्टर उत्पादन अधिक होता है। 



भारत में गेहूं का व्यापार

गेहूं का आंतरिक व्यापार पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश , राजस्थान तथा मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल को किया जाता है। जहां गेहूं खाने वाली जनसंख्या अधिक है। विभाजन से पूर्व भारत बहुत बड़ी मात्रा में गेहूं का निर्यात करता था लेकिन इसी कर्म से जनसंख्या वृद्धि होने , विदेश में गेहूं पैदा करने वाले क्षेत्र की वर्दी होने से प्रदेश का विभाजन होने से पश्चिम पंजाब के गेहूं प्रदेश पाकिस्तान में चले जाने से निर्यात बंद हो गया तथा मांग के आपूर्ति के लिए प्रतिबंध से बहुत सा गेहूं विदेश से आयात करना पड़ता था। यह आयत मुख्यतः अर्जेंटीना , कनाडा, यू. एस. ए. से किया जाता है। अब भारत में पिछले कई वर्षों से नियंत्रण आवश्यकता से अधिक गेहूं पैदा होता है। 


1970 तक राष्ट्रीय उत्पादन और पर्याप्त होने से भारत अरबों रुपए का लाखों टन गेहूं का आयात करता रहा। लेकिन हरित क्रांति की सफलता से देश की स्थिति से आयतन निर्भर बना दिया है। वर्तमान में भारत में सिर्फ काल पड़ने पर ही गेहूं का आयात किया जाता है। 


भारत में गेहूं उत्पादन करने वाले राज्य


भारत में खाद्यान्नों के अंतर्गत बोई गई भूमि के 13% भाग पर गेहूं उगाया जाता है। यह अधिकतर उत्तरी भारत और मध्य भारत की मुख्यतः फसल है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश , गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार राज्य मिलकर कुल उत्पादन का 90 प्रतिशत भाग में गेहूं उगाते हैं। 

उत्तर प्रदेश - यह भारत का सर्वाधिक गेहूं उत्पन्न करता है। दक्षिण की पहाड़ी और पथरी भूमि को छोड़कर समस्त उत्तर प्रदेश में गेहूं की खेती की जाती है। यहां कुल कृषि भूमि में 96% प्रतिशत की उपज के लिए प्रसिद्ध है। 

पंजाब - यहां कुल कृषि भूमि के लगभग 30% भाग पर गेहूं पैदा किया जाता है। यह राज्य कुल उत्पादन का 21% गेहूं उत्पन्न करता है। 

हरियाणा - हरियाणा में कुल कृषि भूमि के लगभग 30% भाग पर गेहूं की खेती की जाती है। हरियाणा के दक्षिणी पूर्व जिलों की जलवायु उच्च है। लेकिन नहर के विकास के सिंचाई करने गेहूं की खेती का विस्तार हो रहा है। 

मध्य प्रदेश - इस राज्य की कृषि भूमि के लगभग 19% भाग पर गेहूं की खेती की जाती है। मध्य प्रदेश देश का 12% गेहूं का क्षेत्र है लेकिन कुल उत्पादन केवल 8.8% है भूमि की उर्वरा शक्ति व सिंचाई के साधनों की कमी के कारण पैदा कम होती है। 


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