आजादी से पूर्व सरकार का स्वरुप कैसा था यहां जाने संपूर्ण जानकारी

 आजादी से पूर्व सरकार का स्वरुप


आजादी से पहले हमारा राजस्थान वर्तमान स्थिति में नहीं था। यह मुख्य,: विभिन्न रियासतों में विभाजित था। 

शासन शक्ति का सर्वोच्च केंद्र राजा होता था 

शासन का यह प्रकार राजशाही शासन कहलाता था। 


आजादी से पूर्व सरकार का स्वरुप
आजादी से पूर्व सरकार का स्वरुप




- राजशाही शासन का स्वरुप

राजस्थान की विभिन्न रियासत ( राज्यों ) में सिसोदिया, राठौर, कछवाहा और चौहान आदि वंश शासक राज्य करते थे। 


राजा : राज्य की संपूर्ण शक्ति का सर्वोच्च केंद्र राजा होता था। 

राजा के सहयोग के लिए सलाहकार एवं मंत्री परिषद होती थी। 

मंत्री : राजा अपने शासनकाल में सहायता हेतु मंत्रियों की नियुक्ति करते थे। 

खजांची : आमदनी और खर्च के हिसाब को संतुलित करना और बचत को सुरक्षित कर राजकोष में भर्ती करने का कार्य खजांची का था। 


परगना अधिकारी: राज्य परगनो में विभाजित था तथा परगने में शांति व्यवस्था के लिए परगना अधिकारी नियुक्त होते थे। 

ग्राम राज्य की सबसे छोटी इकाई थी। 


जागीरदार व्यवस्था

एक व्यवस्थित राज्य के लिए प्रशासनिक व्यवस्था अनिवार्य तत्व है। राजस्थान के मध्यकाल का संपूर्ण शासन तंत्र राजा और जागीरदार व्यवस्था पर आधारित था। 

जागीरदार व्यवस्था का प्रारंभ

जागीरदार व्यवस्था का प्रारंभ राजस्थान में विकसित व स्पष्ट स्वरूप राजपूत के शासनकाल में हुआ। 

जागीरदार व्यवस्था का स्वरूप

–राजस्थान में यह रक्त संबंध पर आधारित से सगोत्रीय कुलीन व्यवस्था थी। 

राजा महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जागीरदारों को नियुक्त करता था। 

राजा और जागीरदार के संबंध स्वामी और सेवक के नहीं होते थे बल्कि भाईचारे एवं सौहार्द पर आधारित होते थे। 


मध्यकालीन जागीरदार व्यवस्था के स्वरूप में परिवर्तन

मुगल काल में मुगलों से संधि के कारण शासको की जागीरदार पर निर्भरता कम हो गई। 

शासन मुगल मनसबदार बन गए और उन्हें मुगलों का संरक्षण प्राप्त हो गया। 


अंग्रेजों का शासन

अंग्रेजी शासन काल के दौरान भारत प्रशासनिक दृष्टि से दो भागों में विभाजित हो गया पहला ब्रिटिश भारत तथा दूसरा रियासती। 

ब्रिटिश कालीन भारत केंद्र शासित प्रदेशों एवं 11 प्रांतो से बना हुआ था सभी प्रांतो पर अलग-अलग गवर्नर थे

1857 ई की क्रांति के बाद भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से सीधा इंग्लैंड के ताज एवं संसद के नियंत्रण में चला गया। 


लॉर्ड कैनिंग को गवर्नर जनरल के साथ-साथ भारत का प्रथम वायसराय नियुक्त किया गया 

1935 ई का भारत शासन अधिनियम- 1 अप्रैल 1937 में लागू किया गया। 

राजस्थान में प्रथम विधानसभा चुनाव - 1952

मुख्यमंत्री : टीकाराम पालीवाल ( प्रथम निर्वाचित )


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